दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स और हथियार तस्करी नेटवर्क का खुलासा, चार आरोपी गिरफ्तार
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ड्रग्स तस्करी और हथियारों की सप्लाई से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि भारत से कूरियर के जरिए अफीम कनाडा भेजी जाती थी और इसके बदले पाकिस्तान सीमा के रास्ते ड्रोन के माध्यम से पंजाब में हथियार पहुंचाए जाते थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क का संबंध खालिस्तानी आतंकी संगठन खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) की गतिविधियों के लिए फंडिंग और हथियार जुटाने से था।
पुलिस के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क को नामित खालिस्तानी आतंकी अर्शदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डाला के इशारे पर संचालित किया जा रहा था। क्राइम ब्रांच के विशेष पुलिस आयुक्त एचजीएस धालीवाल ने बताया कि गिरोह का मुख्य उद्देश्य आतंकी गतिविधियों के लिए आर्थिक मदद और हथियार उपलब्ध कराना था।
करीब एक महीने तक चली कार्रवाई के दौरान पुलिस ने सिमरनजीत सिंह, हरदीप सिंह, यादविंदर सिंह उर्फ जशन संधू और जीवन सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे और उनसे जुड़े ठिकानों से 5.8 किलोग्राम से अधिक अफीम बरामद की गई है।
जांच में पता चला कि आरोपी पश्चिमी दिल्ली के मोती नगर स्थित एक कूरियर कंपनी के माध्यम से कनाडा पार्सल भेजते थे। अफीम को कपड़ों और खाद्य सामग्री के डिब्बों में छिपाया जाता था। तस्कर सिल्वर फॉयल की मदद से पैकेट के अंदर अलग से जगह बनाकर उसमें नशीला पदार्थ रखते थे, ताकि सामान्य सामान की आड़ में उसे विदेश भेजा जा सके।
पार्सल की बुकिंग के दौरान फर्जी केवाईसी और गलत पते का इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस ने कूरियर से जुड़ी पूरी चेन की जांच करते हुए पंजाब, हरियाणा और राजस्थान तक कार्रवाई का दायरा बढ़ाया और नेटवर्क से जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया।
पुलिस जांच के मुताबिक, भारत से कनाडा भेजी जाने वाली अफीम से होने वाली कमाई का इस्तेमाल हथियारों की खरीद और आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाता था। पाकिस्तान सीमा से ड्रोन के जरिए हथियार पंजाब में गिराए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
अफीम की कीमत में भारत और कनाडा के बीच बड़ा अंतर होने के कारण तस्करों को भारी मुनाफा मिलता था। पुलिस के मुताबिक, भारत में करीब 1.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत पर खरीदी गई अफीम कनाडा में कई गुना अधिक कीमत पर बेची जाती थी।
क्राइम ब्रांच ने एनक्रिप्टेड मैसेजिंग एप सिग्नल और कनाडाई व्हाट्सऐप नंबरों की गतिविधियों का विश्लेषण कर नेटवर्क की कड़ियों का पता लगाया। फिलहाल पुलिस पूरे सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों और हथियारों की सप्लाई के नेटवर्क की जांच कर रही है।
