बिहार MLC चुनाव से पहले JDU में हलचल, अनंत सिंह को मनाने के लिए नीतीश कुमार ने ललन सिंह से की मुलाकात
पटना। बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट के चुनाव को लेकर जनता दल यूनाईटेड (JDU) में अंदरूनी हलचल बढ़ गई है। पार्टी के प्रत्याशी नीरज कुमार के नामांकन से पहले मोकामा विधायक अनंत सिंह के रुख ने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार सुबह केंद्रीय मंत्री एवं पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह से मुलाकात की।
दरअसल, JDU ने पटना स्नातक सीट पर मौजूदा विधान पार्षद नीरज कुमार को ही फिर से प्रत्याशी बनाया है। नीरज कुमार सोमवार को नामांकन दाखिल करने वाले हैं। इससे पहले मोकामा विधायक अनंत सिंह जन सुराज के प्रत्याशी के नामांकन कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इतना ही नहीं, वह उनके रोड शो में भी नजर आए थे।
अनंत सिंह के इस रुख को नीरज कुमार के साथ उनकी पुरानी राजनीतिक अदावत से जोड़कर देखा जा रहा है। मोकामा विधानसभा चुनाव के दौरान नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच सामने आए मतभेदों के बाद अब विधान परिषद चुनाव में दोनों के बीच सियासी दूरी एक बार फिर चर्चा में है। अनंत सिंह के जन सुराज प्रत्याशी के समर्थन में उतरने से JDU के भीतर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पार्टी के कुछ नेता अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जबकि एक धड़ा उन्हें बातचीत के जरिए साथ लाने के पक्ष में है। इसी बीच अनंत सिंह की ओर से नीतीश कुमार के समझाने पर मान जाने का संकेत दिए जाने के बाद पार्टी नेतृत्व की कोशिशों को लेकर उम्मीद बढ़ी है।
इसी क्रम में नीतीश कुमार का ललन सिंह से मिलना भी अहम माना जा रहा है। ललन सिंह पहले ही JDU में किसी तरह के गतिरोध से इनकार कर चुके हैं। हालांकि, अनंत सिंह के लगातार अलग रुख अपनाने के कारण पटना स्नातक सीट का चुनाव पार्टी के लिए महत्वपूर्ण बन गया है।
इस चुनाव पर महागठबंधन और जन सुराज के साथ-साथ JDU और भाजपा की भी नजर है। यदि अनंत सिंह अंत तक नीरज कुमार के खिलाफ सक्रिय रहते हैं तो उनके समर्थकों की भूमिका चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। यही वजह है कि नीरज कुमार के नामांकन से पहले पार्टी नेतृत्व अनंत सिंह को अपने साथ लाने की कोशिश में जुटा हुआ है।
अब निगाहें नीरज कुमार के नामांकन और उसके बाद अनंत सिंह के अंतिम रुख पर टिकी हैं। अगर दोनों नेताओं के बीच चल रही राजनीतिक दूरी खत्म नहीं होती है तो पटना स्नातक सीट का मुकाबला और JDU की अंदरूनी राजनीति दोनों ही चर्चा का बड़ा विषय बन सकते हैं।
