15 महीने बाद फिर शुरू होगी टाटा स्टील की विजया-टू खदान, संचालन के लिए एमडीओ एजेंसी का होगा चयन
रांची (पश्चिमी सिंहभूम)। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में लंबे समय से बंद पड़ी टाटा स्टील की विजया-टू आयरन ओर खदान को फिर से चालू करने की तैयारी तेज हो गई है। करीब 15 महीने से ठप पड़े खनन कार्य को दोबारा शुरू करने के लिए कंपनी ने नई रणनीति तैयार की है। इसके तहत पहली बार माइन डेवलपर एंड ऑपरेटर (एमडीओ) व्यवस्था लागू की जाएगी। खदान के संचालन के लिए एमडीओ एजेंसी का चयन किया जाना है, जिसकी प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच रही है।
जानकारी के मुताबिक, खदान संचालन के लिए जारी निविदा में देश की चार से पांच प्रमुख कंपनियों ने रुचि दिखाई है। टाटा स्टील दिवाली के बाद इनमें से उपयुक्त कंपनी का चयन कर सकती है। एजेंसी तय होने के बाद खदान को दोबारा शुरू करने से संबंधित गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के साथ रोजगार और स्थानीय कारोबार को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
नई व्यवस्था के तहत विजया-टू खदान के संचालन की जिम्मेदारी एक ही एमडीओ एजेंसी को सौंपी जाएगी। खनन से लेकर अयस्क की ढुलाई और रेलवे रैक में लोडिंग तक की पूरी प्रक्रिया इसी एजेंसी के नियंत्रण में रहेगी। इसके अलावा क्रशिंग, स्क्रीनिंग, पानी का छिड़काव, सड़कों का रखरखाव, ग्राइंडिंग और फीडिंग जैसे कार्य भी इसी के माध्यम से संचालित होंगे।
गौरतलब है कि पहले खदान से संबंधित अलग-अलग जिम्मेदारियां कई कंपनियों और स्थानीय एजेंसियों के पास थीं। इनमें बीएस माइनिंग, बीटी ट्रांसपोर्ट, आईएसएस, मधु ट्रांसपोर्ट, गिलुवा इंटरप्राइजेज, पुरती ट्रांसपोर्ट, विक्रम इंटरप्राइजेज, नवीन रोडलाइन, मेमको इंटरप्राइजेज, बड़ाजामदा लोडिंग सिंडिकेट और टिलू दत्ता सहित करीब डेढ़ दर्जन एजेंसियां शामिल थीं।
अब एकीकृत संचालन व्यवस्था लागू होने से अलग-अलग कार्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही प्रबंधन की निगरानी, कार्यों की जवाबदेही और संचालन में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
खदान को फिर से संचालित करने की दिशा में 31 अगस्त 2026 को जिला प्रशासन और टाटा स्टील लिमिटेड के बीच महत्वपूर्ण समझौता हुआ था। इस औपचारिक समझौते पर पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने जिला प्रशासन की ओर से हस्ताक्षर किए थे।
वहीं, टाटा स्टील की तरफ से महाप्रबंधक देवाशीष जेना, माइनिंग प्लान एवं प्रोजेक्ट चीफ अवनीष कुमार और विजया-टू माइंस के चीफ सह माइंस एजेंट राजीव कुमार ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते को खदान के पुनः संचालन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विजया-टू आयरन ओर खदान घाटकुड़ी रक्षित वन क्षेत्र में स्थित है। इसका कुल क्षेत्रफल 383.20 एकड़ यानी लगभग 155.078 हेक्टेयर है। इस खदान का मूल पट्टा मेसर्स उषा मार्टिन लिमिटेड को 18 अगस्त 2005 से 17 अगस्त 2025 तक 20 वर्षों के लिए प्रदान किया गया था।
बाद में सरकारी स्वीकृति के आधार पर खनन पट्टे का हस्तांतरण टाटा स्पंज आयरन लिमिटेड को किया गया। इसके बाद कंपनी का नाम टाटा स्टील लॉन्ग प्रोडक्ट्स लिमिटेड हुआ और अंततः इसका विलय टाटा स्टील लिमिटेड में हो गया।
खान एवं खनिज संशोधन अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत टाटा स्टील ने खनन पट्टे की अवधि 50 वर्षों तक बढ़ाने का अनुरोध किया था। इस प्रस्ताव को राज्य मंत्रिपरिषद ने 28 दिसंबर 2016 को मंजूरी प्रदान की थी।
विजया-टू खदान के दोबारा शुरू होने से पश्चिमी सिंहभूम जिले की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है। खनन कार्य शुरू होने पर प्रत्यक्ष रूप से खदान में काम करने वाले लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। वहीं, परिवहन, लोडिंग, मशीनरी रखरखाव और अन्य सहायक सेवाओं से जुड़े कारोबारियों को भी लाभ मिल सकता है।
विशेष रूप से घाटकुड़ी और आसपास के क्षेत्रों में खनन से जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है। अब सभी की नजर एमडीओ एजेंसी के चयन और उसके बाद खदान में उत्पादन शुरू होने की प्रक्रिया पर टिकी है।
