हरियाणा में फिर बदलेगा मौसम, 12 अक्टूबर तक बारिश-तेज हवाओं के आसार; मंडियों में खुले अनाज पर संकट
सोनीपत । हरियाणा में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने वाला है। प्रदेश में 7 अक्टूबर से लेकर 12 अक्टूबर तक कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम में संभावित बदलाव ने किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि प्रदेश की कई मंडियों में धान, बाजरा, मूंग और दूसरी फसलें अभी खुले में पड़ी हैं। बारिश होने पर इनके भीगने से गुणवत्ता और कीमत प्रभावित होने का खतरा है।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से आसमान साफ रहने और पश्चिमी हवाओं के लगातार प्रभाव के चलते दिन और रात के तापमान में बढ़ोतरी हो रही थी। अब लगातार सक्रिय होने वाले पश्चिमी विक्षोभ मौसम की स्थिति बदल सकते हैं। इसके साथ ही तापमान में गिरावट आने और लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलने की संभावना है।
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 7 अक्टूबर की रात एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। इसका प्रभाव मुख्य रूप से हरियाणा के उत्तरी हिस्सों में देखने को मिलेगा। इन क्षेत्रों में बारिश की संभावना है, जबकि पश्चिमी और दक्षिणी जिलों में बादल छाने के साथ कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी हो सकती है।
इसके बाद 9 अक्टूबर की रात एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है। इसके प्रभाव से उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी हरियाणा में बारिश का दायरा बढ़ सकता है। वहीं, 13 अक्टूबर की रात एक अन्य पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मौसम में फिर बदलाव आने के संकेत हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में इस दौरान बर्फबारी की संभावना भी बन सकती है।
बारिश की संभावना के बीच सबसे ज्यादा चिंता मंडियों में खुले में रखी फसलों को लेकर है। धान, बाजरा, मूंग समेत कई फसलों का बड़ा हिस्सा अभी खुले में पड़ा हुआ है। यदि तेज बारिश हुई तो अनाज में नमी बढ़ने के साथ उसकी गुणवत्ता खराब होने की आशंका है। किसानों को फसल को सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने की जरूरत पड़ सकती है।
राइस रिसर्च स्टेशन कौल के रीजनल डायरेक्टर डॉ. मेहरचंद के अनुसार, धान की लंबी अवधि वाली कई किस्मों की कटाई अभी बाकी है। ऐसे में बारिश होने पर खेतों में खड़ी फसल में बीमारियां फैलने का जोखिम बढ़ सकता है।
वहीं, तेज हवाएं गन्ने की फसल के लिए भी परेशानी खड़ी कर सकती हैं। हवा की गति अधिक रही तो खेत में खड़ा गन्ना गिर सकता है, जिससे फसल की उपज और गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
बाजरा विशेषज्ञ डॉ. अनिल के मुताबिक राज्य में बाजरे की कटाई लगभग पूरी हो चुकी है। इसलिए खेतों में खड़ी बाजरे की फसल को बड़े नुकसान की आशंका कम है। हालांकि मंडियों में खुले में रखा बाजरा बारिश में भीग गया तो दानों का रंग काला पड़ सकता है, जिससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
