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अनंत सिंह की जमानत पर 30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, दुलारचंद यादव हत्याकांड में बढ़ी मुश्किलें

पटना। बिहार के चर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड में मोकामा के विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पटना हाईकोर्ट से मिली उनकी जमानत को रद्द करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट 30 अक्टूबर को सुनवाई करेगा। मृतक दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर जमानत के फैसले को चुनौती दी है। याचिका में दावा किया गया है कि हाईकोर्ट ने अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। खास बात यह है कि सुनवाई की तारीख दुलारचंद यादव की पहली बरसी के दिन ही निर्धारित की गई है।

इस मामले में बिहार सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अनंत सिंह के आपराधिक रिकॉर्ड का हवाला दिया है। सरकार की ओर से हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, अपहरण और आर्म्स एक्ट समेत विभिन्न गंभीर मामलों में उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों का उल्लेख किया गया है।

चुनावी टकराव के बाद हुई थी दुलारचंद यादव की मौत

यह मामला वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान हुई हिंसक घटना से जुड़ा है। 30 अक्टूबर को मोकामा सीट से जदयू प्रत्याशी अनंत सिंह और जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के समर्थकों के काफिले आमने-सामने आ गए थे। इसी दौरान हुई हिंसा में दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी। घटना के बाद पुलिस ने अनंत सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

जेल में रहते हुए ही अनंत सिंह ने विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। इसके बाद मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया। अब उनकी जमानत को चुनौती दिए जाने के बाद मामले की सुनवाई पर राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजरें टिकी हैं।

जदयू ने अनंत सिंह और नीलम देवी को छह साल के लिए निकाला

दुलारचंद यादव हत्याकांड के बीच अनंत सिंह को लेकर बिहार की राजनीति में भी हलचल तेज है। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने पार्टी विरोधी गतिविधियों का हवाला देते हुए अनंत सिंह और उनकी पत्नी, पूर्व विधायक नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है।

पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा भी की है। दूसरी ओर, बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने नीलम देवी को पटना स्थित 1, मॉल रोड का सरकारी आवास 25 नवंबर तक खाली करने का निर्देश दिया है। इससे पहले उन्हें 20 सूत्री समिति से भी हटा दिया गया था और राज्य मंत्री का दर्जा वापस ले लिया गया था। कार्रवाई के बाद जदयू ने बाढ़ संगठनात्मक जिला इकाई को भी भंग कर दिया।

नई पार्टी बनाने के संकेत, नेताओं की मुलाकातों से बढ़ी चर्चा

जदयू से निष्कासन के बाद अनंत सिंह ने पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए नई राजनीतिक पार्टी बनाने का दावा किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि आगामी चुनाव में उन्हें पार्टी से बाहर करने वालों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। साथ ही उन्होंने दावा किया कि जदयू अगला चुनाव केवल 12 सीटों पर सिमट जाएगी।

इस घटनाक्रम के बीच कांग्रेस की पूर्व विधायक नीतू सिंह ने अनंत सिंह से मुलाकात की, जिससे बिहार की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। वहीं, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना पार्टी प्रमुख का अधिकार है। इस बीच केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह की मुख्यमंत्री से मुलाकात ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी है।

अब 30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर सबकी निगाहें रहेंगी। अदालत अनंत सिंह की जमानत रद्द करने की मांग पर क्या रुख अपनाती है, यह आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से अहम होगा।

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